Bagless Day Activities July 2026 - SCHOOL STUFFS 36GARH
Bagless Day Activities July 2026 - SCHOOL STUFFS 36GARH

School Bagless Day Activities for July 2026: Complete Guide

Discover the complete list of fun and educational school Bagless Day activities for July 2026. From Van Mahotsav plantation to Doctors Day, Rath Yatra, and Kargil Vijay Diwas events!

Table of Contents

बैगलेस डे गतिविधियाँ: माह जुलाई 2026

नमस्कार शिक्षक मित्रों!

आधुनिक शिक्षा प्रणाली में केवल किताबी ज्ञान ही बच्चों के सर्वांगीण विकास (Holistic Development) के लिए पर्याप्त नहीं है। आज के समय में व्यावहारिक ज्ञान, सामाजिक मूल्य, सांस्कृतिक समझ, शारीरिक स्वास्थ्य और रचनात्मकता का मिश्रण होना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, छत्तीसगढ़ राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत विद्यालयों में ‘बैगलेस डे’ (Bagless Day) की शुरुआत की गई है।

जुलाई 2026 का महीना रिमझिम बारिश के साथ-साथ ज्ञान, देशभक्ति, सांस्कृतिक उत्सवों और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को याद दिलाने वाला महीना है। इस ब्लॉग में हम जुलाई 2026 के प्रत्येक शनिवार को आयोजित होने वाली सभी महत्वपूर्ण गतिविधियों, राष्ट्रीय उत्सवों, महान विभूतियों की जयंतियों और विद्यार्थियों के व्यावहारिक विकास के लिए बनाई गई योजनाओं के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। 

आइए जानते हैं जुलाई माह का पूरा कार्यक्रम:

🌟 प्रथम शनिवार (4 जुलाई 2026)

1. वन महोत्सव (1 से 7 जुलाई) – 

वन महोत्सव प्रतिवर्ष जुलाई माह के प्रथम सप्ताह (1 से 7 जुलाई) में पूरे भारत में मनाया जाता है। हमारे जीवन में वृक्षों के महत्व को रेखांकित करने के लिए इस महोत्सव की अवधारणा कोडाइकनाल के डॉ. एम. एस. रंधावा के द्वारा की गई थी, जिन्होंने सबसे पहले समुदाय में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण पहल का आयोजन किया था। वर्ष 1950 में, इस अभियान की अपार सफलता से प्रेरित होकर भारत के तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी (के. एम. मुंशी) ने इसे एक राष्ट्रव्यापी वृक्षारोपण आंदोलन का रूप दिया। तब से लेकर आज तक, यह महोत्सव हर साल पर्यावरण को बचाने और वनों के क्षेत्रफल को बढ़ाने के संकल्प के साथ मनाया जाता है।

शाला में आयोजित की जाने वाली गतिविधियाँ –

i)आओ पौधे लगाएँ (वृक्षारोपण अभियान):

  • विद्यालय के शिक्षक सभी बच्चों को परिसर के उस हिस्से में ले जाएँगे जहाँ मिट्टी उपजाऊ है और पानी की पर्याप्त व्यवस्था है।
  • प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी पसंद का एक पौधा (जैसे नीम, तुलसी, आम, या पीपल) विद्यालय परिसर में या फिर यदि स्थान सीमित हो तो एक सुंदर गमले में रोपना होगा।
  • स्वावलंबन का पाठ: इस गतिविधि की सबसे खास बात यह है कि लगाए गए पौधे की देखरेख, उसे समय पर पानी देना और उसकी सुरक्षा करने की पूरी जिम्मेदारी स्वयं उस बच्चे की होगी। इससे बच्चों में जिम्मेदारी और प्रकृति के प्रति जुड़ाव की भावना पैदा होगी।

ii)चलो एक वृक्ष गोद लें (Tree Adoption Program):

  • अक्सर हम पौधे लगा तो देते हैं, लेकिन सही देखरेख के अभाव में वे नष्ट हो जाते हैं। इसे रोकने के लिए ‘चलो एक वृक्ष गोद लें’ गतिविधि चलाई जाएगी।
  • विद्यार्थी अपने घर के आसपास, स्कूल में या मोहल्ले में किसी भी ऐसे पेड़ को चुनेंगे जो उन्हें सबसे ज्यादा पसंद हो। उस वृक्ष की रखवाली की पूरी जिम्मेदारी छात्र की होगी।
  • इसके साथ ही बच्चों को पर्यावरण वैज्ञानिक की तरह उस पेड़ का सूक्ष्म अवलोकन (Observation) करना होगा और एक निर्धारित प्रारूप को भरना होगा।

अवलोकन प्रारूप (Format for Tree Observation)

1. भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा (16 जुलाई) – 
रथ यात्रा प्रतिवर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है। यह उत्सव विशेष रूप से ओडिशा के पुरी शहर में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से जुड़ा है, लेकिन इसकी भव्यता पूरे भारतवर्ष और विश्व में देखी जाती है। इस पवित्र दिन पर भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण), उनके बड़े भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान अपने मंदिर के गर्भ गृह से बाहर निकलकर अपनी प्रजा के सुख-दुख को स्वयं देखने के लिए रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं। लाखों श्रद्धालुओं और भक्तों द्वारा इन विशाल रथों को पवित्र रस्सियों से खींचकर पूरे शहर की सड़कों पर ले जाया जाता है, ताकि समाज का प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह किसी भी जाति या वर्ग का हो, भगवान के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सके। यह त्योहार सामाजिक समरसता, समानता और सामूहिक सहयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है।

आयोजित होने वाली व्यावहारिक गतिविधियाँ – “आओ रथ बनाएँ”

इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य बच्चों में रचनात्मकता, हस्तशिल्प कौशल (Craft Skills) और टीम वर्क की भावना को बढ़ावा देना है। बच्चे समूहों में मिलकर पुराने कबाड़ और घरेलू सामानों से एक सुंदर रथ का मॉडल तैयार करेंगे।

  • आवश्यक सामग्रियाँ:

    1. चार्ट पेपर और रंगीन क्राफ्ट पेपर

    2. स्केल, पेंसिल और कैंची

    3. गोंद, फेविकोल या सेलो टेप

    4. खाली बॉक्स (जैसे जूते के डिब्बे, माचिस के खाली डिब्बे या कार्डबोर्ड)

    5. सुतली या मजबूत धागा

    6. खिलौने वाली पुरानी कार या प्लास्टिक के पहिए (रथ को गति देने के लिए)

  • निर्माण की प्रक्रिया:

    • शिक्षक बच्चों को 4 से 5 के समूहों में विभाजित करेंगे।

    • बच्चे खाली बॉक्स को रथ के आधार (Base) के रूप में तैयार करेंगे और उस पर रंगीन कागज चिपकाएँगे।

    • चार्ट पेपर को मोड़कर रथ का ऊपरी शिखर या गुंबद बनाया जाएगा।

    • खिलौने वाली कार के पहियों या कार्डबोर्ड से कटे पहियों को बॉक्स के नीचे टेप की मदद से जोड़ा जाएगा।

    • रथ के आगे सुतली बांधी जाएगी ताकि उसे खींचा जा सके। बच्चे रंगीन स्केच पेन से रथ पर सुंदर पारंपरिक आकृतियाँ भी उकेरेंगे।

वैचारिक चर्चा और संवादात्मक सत्र –

रथ निर्माण के पश्चात शिक्षक बच्चों से निम्नलिखित बिंदुओं पर बातचीत करेंगे:

  1. क्या तुमने कभी अपने शहर, गाँव या टीवी पर जगन्नाथ पुरी की विशाल रथ यात्रा देखी है? आपको वह दृश्य कैसा लगा?

  2. रथ यात्रा के दिन मुख्य रूप से क्या-क्या किया जाता है? रथों को कौन खींचता है?

  3. रथ यात्रा के पावन अवसर पर प्रसाद के रूप में क्या वितरित किया जाता है? (जैसे छत्तीसगढ़ में इस दिन मालपुआ, चेरापूंजी का विशेष प्रसाद या अंकुरित मोंग-चना और पोहा चढ़ाने की परंपरा है)।

चतुर्थ कालखंड: रथों का प्रदर्शन और लघु रैली –

सभी समूहों के बच्चे अपने-अपने बनाए गए कलात्मक रथों को कक्षा के सामने प्रदर्शित करेंगे। वे बताएंगे कि उन्होंने किस सामग्री का उपयोग कहाँ किया है। इसके बाद, बच्चे कतारबद्ध होकर अपने छोटे रथों को खींचते हुए “जय जगन्नाथ” के नारों के साथ विद्यालय परिसर में एक छोटी सी आनंदमयी यात्रा निकालेंगे, जिससे पूरा वातावरण उल्लासपूर्ण हो जाएगा। 

डॉ. खूबचंद बघेल जन्मदिवस (19 जुलाई) –

डॉ. खूबचंद बघेल का जन्म 19 जुलाई 1900 को रायपुर जिले के पथरी गाँव में हुआ था। वे छत्तीसगढ़ की माटी के एक ऐसे महान सपूत थे, जिन्हें ‘छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का प्रथम स्वप्नदृष्टा’ माना जाता है। वे केवल एक कुशल चिकित्सक ही नहीं थे, बल्कि एक महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर राजनेता, अद्वितीय लेखक और समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता भी थे।

डॉ. बघेल ने अपना पूरा जीवन छत्तीसगढ़ के पिछड़ेपन को दूर करने, यहाँ के किसानों, मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करने और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने में समर्पित कर दिया। उन्होंने ‘छत्तीसगढ़ भातृ संघ’ की स्थापना की थी ताकि छत्तीसगढ़ को एक पृथक राज्य के रूप में पहचान दिलाई जा सके। वे किसानों के मुखर समर्थक थे और हमेशा स्वदेशी संस्कृति और लोक भाषा को बढ़ावा देते थे। उनकी जयंती हर साल 19 जुलाई को हमें अपने राज्य के प्रति हमारे कर्तव्यों और हमारी सांस्कृतिक जड़ों की याद दिलाती है।

आयोजित होने वाली व्यावहारिक गतिविधियाँ –

1. भाषण और वक्तृत्व प्रतियोगिता:

  • विद्यार्थी डॉ. खूबचंद बघेल जी के जीवन संघर्ष, स्वतंत्रता संग्राम में उनके द्वारा दिए गए योगदान और छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण में उनकी ऐतिहासिक भूमिका पर विचार करते हुए ओजस्वी भाषण प्रस्तुत करेंगे।
  • इसके लिए शिक्षक बच्चों को पहले से कुछ महत्वपूर्ण बिंदु नोट करवाएँगे।

2. पोस्टर, चार्ट और स्लोगन निर्माण:  

  • बच्चे चार्ट पेपर पर डॉ. खूबचंद बघेल जी का रेखाचित्र (Sketch) बनाएँगे।
  • वे उनके जीवन के मुख्य विचारों जैसे — “किसानों का उत्थान ही देश का उत्थान है”, “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” या सामाजिक समानता पर आधारित सुंदर स्लोगन और नारे लिखेंगे।

3. देशभक्ति गीत और छत्तीसगढ़ी संस्कृति प्रश्नोत्तरी (Quiz):  

  • राज्य के गौरव को बढ़ाने वाले राज्य गीत “अरपा पैरी के धार” के साथ-साथ अन्य देशभक्ति और क्षेत्रीय गीतों की गायन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
  • छत्तीसगढ़ के सामान्य ज्ञान, इतिहास और डॉ. खूबचंद बघेल के जीवन पर आधारित एक त्वरित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता (Quiz) का आयोजन किया जाएगा।

वैचारिक चर्चा और संवादात्मक सत्र – गतिविधियों के बाद कक्षा में एक संवादात्मक सत्र का आयोजन किया जाएगा, जिसमें शिक्षक बच्चों से पूछेंगे:

  • हमें डॉ. खूबचंद बघेल जी के जीवन से आज के समय में क्या प्रेरणा मिलती है? हमें अपने समाज और किसानों के प्रति कैसा व्यवहार रखना चाहिए?
  • छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर की संस्कृति पूरे विश्व में क्यों प्रसिद्ध है?
  • शिक्षक कक्षा में छत्तीसगढ़ का राजनैतिक नक्शा (Map) लगाएंगे और बच्चों से कहेंगे कि वे इसमें रायपुर, दुर्ग, बस्तर, बिलासपुर और अपने स्वयं के गृह जिले तथा उसके पड़ोसी जिलों की स्थिति को ढूंढें और पहचानें। इससे बच्चों का भौगोलिक ज्ञान सुदृढ़ होगा।

 भूमिका अभिनय (Role Play) और कला प्रदर्शन –

इस कालखंड में बच्चे खूबचंद बघेल जी का रोल प्ले (भूमिका अभिनय) करेंगे। खादी के वस्त्र और चश्मा पहनकर छात्र मंच पर आएंगे और डॉ. बघेल के ऐतिहासिक बयानों और किसानों को प्रेरित करने वाले संवादों को बोलेंगे। इसके साथ ही, बच्चों द्वारा बनाए गए सभी पोस्टरों और चार्ट्स की एक प्रदर्शनी (Exhibition) स्कूल के कॉरिडोर में लगाई जाएगी, जिसे अन्य कक्षाओं के बच्चे भी देख सकेंगे।

1. अभिभावक (माता/पिता) दिवस: 

अभिभावक दिवस प्रतिवर्ष जुलाई माह के चौथे रविवार को मनाया जाता है, और विद्यालय में इसकी पूर्व तैयारी चौथे शनिवार को की जाती है। हमारे जीवन की शुरुआत हमारे माता-पिता से होती है। वे न केवल हमारा पालन-पोषण करते हैं, बल्कि हमें समाज में एक जिम्मेदार, संस्कारी और राष्ट्रभक्त नागरिक बनाने के लिए अपना पूरा जीवन न्यौछावर कर देते हैं। यह दिवस बच्चों को अपने माता-पिता के प्रति सम्मान, आदर और कृतज्ञता व्यक्त करना सिखाता है।

आयोजित होने वाली गतिविधि — “थैंक यू ग्रीटिंग कार्ड”

  • सामग्री: रंगीन चार्ट पेपर (आकार 4’x4′ या आवश्यकतानुसार छोटा), सूखी पत्तियां, फूल, गोंद, रंगीन पेंसिल और स्केच पेन।

  • प्रक्रिया: बच्चे चार्ट पेपर को मोड़कर एक सुंदर ग्रीटिंग कार्ड बनाएंगे। कार्ड के बाहरी हिस्से को वे सूखी पत्तियों और फूलों के कोलाज से सजाएंगे। भीतर वे अपने माता-पिता के लिए अपने शब्दों में कोई अनमोल वचन, कविता या दिल से “Thank You” (धन्यवाद) लिखेंगे।

2. चंद्रशेखर आज़ाद जन्मदिवस (23 जुलाई): 

भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को हुआ था। वे बचपन से ही अत्यंत साहसी, निडर और परम देशभक्त थे। जब असहयोग आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया, तो अदालत में मजिस्ट्रेट के सामने उन्होंने अपना नाम “आज़ाद”, पिता का नाम “स्वतंत्रता” और अपना पता “जेलखाना” बताया था। उनका यह अदम्य साहस आज भी करोड़ों युवाओं के दिलों में देशभक्ति की लौ जलाता है।

 आयोजित होने वाली गतिविधि — “आओ चित्र पहचानें और पोस्टर बनाएँ” –

  • शिक्षक बच्चों को चंद्रशेखर आज़ाद, कारगिल युद्ध के नायकों (जैसे कैप्टन विक्रम बत्रा, मनोज कुमार पांडे) के चित्र दिखाएंगे और उनसे संवादात्मक सवाल पूछेंगे: “ये कौन हैं? इन्होंने हमारे देश की रक्षा के लिए क्या किया?”

3. कारगिल विजय दिवस (26 जुलाई): 

वर्ष 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर के कारगिल की बर्फीली चोटियों पर एक भयंकर युद्ध लड़ा गया था। हमारे वीर भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए ‘ऑपरेशन विजय’ चलाया और पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर कारगिल की चोटियों पर तिरंगा फहराया था। 26 जुलाई को भारत की इस ऐतिहासिक विजय की स्मृति में ‘कारगिल विजय दिवस’ मनाया जाता है।

आयोजित होने वाली गतिविधि — “आओ चित्र पहचानें और पोस्टर बनाएँ”

  • बच्चे कारगिल के वीरों को श्रद्धांजलि देते हुए “सैनिक और तिरंगा” विषय पर सुंदर पोस्टर और स्लोगन लिखेंगे।

4. गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई): 

गुरु पूर्णिमा प्रतिवर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह त्योहार हमारे जीवन को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाले हमारे गुरुओं (शिक्षकों) के प्रति अगाध प्रेम, श्रद्धा और आस्था प्रकट करने का महापर्व है। सनातन परंपरा में इस दिन महान महर्षि वेद व्यास जी की जयंती मनाई जाती है, जिन्होंने चारों वेदों, महाभारत और पुराणों जैसे महान ग्रंथों की रचना की थी। हिंदू संस्कृति में गुरु को गोविंद (ईश्वर) से भी उच्च स्थान दिया गया है।

आयोजित होने वाली गतिविधि — “गुरु वंदना एवं श्लोक प्रतियोगिता”

  • विद्यार्थी कक्षा में कबीरदास जी और अन्य संतों के प्रसिद्ध गुरु-महिमा के दोहे (जैसे “गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागू पाय…”) और संस्कृत के श्लोक याद करके सुनाएंगे।

  • शिक्षक बच्चों को इन श्लोकों का वैज्ञानिक और व्यावहारिक अर्थ समझाएंगे।

वैचारिक चर्चा और संवादात्मक सत्र

इस दिन का संवादात्मक सत्र बेहद भावुक और ज्ञानवर्धक होगा। शिक्षक बच्चों से निम्नलिखित संवाद करेंगे:

  1. पारिवारिक कर्तव्य: माता-पिता हमारे लिए दिन-रात क्या-क्या त्याग करते हैं? तुम घर के किन-किन कामों में (जैसे साफ-सफाई, पानी भरना, बर्तनों को संभालना) अपने माता-पिता की मदद करते हो? ऐसे कौन से काम हैं जो तुम अब बड़े हो गए हो और माता-पिता की मदद के बिना खुद कर सकते हो?

  2. देशभक्ति की भावना: यदि आपको देश की सेवा करने का मौका मिले, तो आप सेना में जाकर या एक अच्छे नागरिक बनकर देश के लिए क्या करना चाहेंगे?

  3. शिक्षक का महत्व: एक अच्छा शिक्षक आपके जीवन को कैसे बदल सकता है?

 अभिभावक मिलन एवं भव्य सांस्कृतिक प्रदर्शन

इस विशेष दिन के अंतिम कालखंड में विद्यालय में विद्यार्थियों के अभिभावकों (माता-पिता) को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा। कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार होगी:

  • प्रत्येक बच्चा मंच पर अपने माता-पिता को सादर आमंत्रित करेगा, उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेगा और अपने हाथों से बनाया गया “धन्यवाद कार्ड” उन्हें भेंट करेगा। यह दृश्य अत्यंत भावुक और संस्कारों से परिपूर्ण होता है।

  • इसके बाद बच्चे देश प्रेम से ओतप्रोत देशभक्ति कविता पाठ, कारगिल युद्ध पर आधारित लघु नाटक (Role Play), और गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में सामूहिक गुरु वंदना प्रस्तुत करेंगे। अंत में, पोस्टर एवं स्लोगन प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

जुलाई 2026 की इन सभी गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए SCERT द्वारा शिक्षकों को निम्नलिखित कड़े और स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है:

  1. कक्षा स्तर का ध्यान: उपर्युक्त सभी गतिविधियों को कक्षा 6वीं से 8वीं के विद्यार्थियों के मानसिक और शारीरिक स्तर के अनुसार ही करवाया जाए। बहुत अधिक कठिन या जटिल कार्य बच्चों पर न थोपे जाएं।

  2. समावेशी भागीदारी: कक्षा के प्रत्येक बच्चे की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। जो बच्चे संकोची स्वभाव के हैं, उन्हें छोटे समूहों में जिम्मेदारी देकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाया जाए।

  3. स्थानीय संसाधनों का उपयोग: फर्स्ट एड बॉक्स, रथ निर्माण या ग्रीटिंग कार्ड बनाने में महंगी सामग्रियों के स्थान पर आसपास उपलब्ध प्राकृतिक वस्तुओं (जैसे सूखी पत्तियां, टहनियां) और कबाड़ (Best out of Waste) का उपयोग करने के लिए बच्चों को प्रेरित किया जाए।

  4. अनिवार्य देशभक्ति गायन: प्रत्येक शनिवार को स्कूल की छुट्टी होने से पहले या प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम्) के साथ-साथ अन्य देशभक्ति गीतों का सामूहिक गायन एवं अंतर-सदन प्रतियोगिताओं का आयोजन अनिवार्य रूप से किया जावे।

जुलाई माह की इन बस्ता-मुक्त (Bagless Day) गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में निम्नलिखित कौशलों और जीवन मूल्यों का विकास सुनिश्चित होगा:

  • पर्यावरण चेतना: ‘वन महोत्सव’ और पेड़ गोद लेने की गतिविधि से बच्चे केवल किताबी रूप से नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप से पर्यावरण के रक्षक बनेंगे।

  • जीवन रक्षक कौशल (Life Skills): फर्स्ट एड बॉक्स बनाना सीखने से बच्चे प्राथमिक चिकित्सा के प्रति जागरूक होंगे, जो जीवन में कभी भी आपातकाल के समय उनके काम आ सकता है।

  • कलात्मक और गणितीय सोच: रथ निर्माण के दौरान कार्डबोर्ड को काटना, मापना, पहियों का संतुलन बनाना बच्चों में व्यावहारिक गणित और ज्यामिति (Geometry) की समझ को विकसित करता है।

  • नेतृत्व और राष्ट्रीय भावना: डॉ. खूबचंद बघेल और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे महापुरुषों के रोल प्ले से बच्चों में सार्वजनिक मंच पर बोलने का साहस (Stage Courage) और नेतृत्व क्षमता (Leadership Quality) का विकास होता है।

  • संस्कार और कृतज्ञता: माता-पिता को कार्ड देना और गुरु वंदना करना बच्चों के भीतर नैतिक मूल्यों, बड़ों के प्रति आदर और भारतीय संस्कृति के महान संस्कारों को सिंचित करता है।

इस विस्तृत शैक्षणिक कार्ययोजना को अपने विद्यालय में लागू करने और बच्चों को एक आनंदमयी सीखने का माहौल देने के लिए आज ही से तैयारी शुरू करें!

 हमारे साथ जुड़ें और साझा करें!

  • आपके विद्यालय में जुलाई 2026 के ‘नो बैग डे’ शनिवार को कौन सी गतिविधि सबसे पहले आयोजित की जा रही है? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

  • बच्चों द्वारा बनाए गए रथ, फर्स्ट एड बॉक्स और ग्रीटिंग कार्ड की तस्वीरें हमारे सोशल मीडिया हैंडल पर हैशटैग #BaglessSaturday2026 के साथ साझा करना न भूलें!

  • इस महत्वपूर्ण और विस्तृत गाइड को अपने शिक्षक समूहों, संकुल (Cluster) के व्हाट्सएप ग्रुप और पालक-शिक्षक संघ (PTA) के साथ तुरंत शेयर (Share) करें, ताकि हर बच्चे तक इस प्रगतिशील शिक्षा का लाभ पहुँच सके।

पीडीएफ डाउनलोड: SCERT छत्तीसगढ़ द्वारा जारी इस मूल निर्देशिका को अपने पास सुरक्षित रखने के लिए, आप अपने सिस्टम या ड्राइव में “bagless day 6-8.pdf” नाम की फाइल को खोजकर इसे भविष्य के संदर्भ के लिए डाउनलोड और सेव कर सकते हैं।

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